YCMOU B.A Second year HIN 212 solved Assignments 2022
HIN 212-हिंदी: कथनपर साहित्य
🔹कफ़न इस कहानी के कथोपकथन और भाषा शैली पर प्रकाश डालीए।
🔹कहानी की प्रस्तुती के अंग को स्पष्टकरे ।
🔹उपन्यास के विषय या स्त्रोत के आधार पर वर्गीकरण लिखिए
🔹फंदी नाटक की शैली और संवाद योजना को स्पष्ट करे।
🔹कफ़न इस कहानी के कथोपकथन और भाषा शैली पर प्रकाश डालीए।
उत्तर :
इस कहानी की भाषा-शैली सरल, सशक्त एवं सजीव है। इससे प्रौढता परिपक्वता एवं सप्राणता पर्याप्त मात्रा में मिलती है। वह आधन्त पात्रानुकूल है। वातावरण के चित्रण में भाषा पूर्णतः वर्णनात्मक हो गयी है। इस कहानी में भाषा की बिम्बात्मकता सर्वत्र दिखायी देती है, उदाहरणार्थ -
"सबेरे माधव ने कोठरी में जाकर देखा तो उसकी स्त्री ठण्डी हो गयी थी। उसके मुंह पर मक्खियाँ भिनक रही थीं। पथराई हुई आँखें ऊपर टँगी हुई थीं। सारी देह धूल से लथपथ हो रही थी। उसके पेट में बच्चा मर गया था।" इस कहानी में नाटकीयता प्रायः दिखायी देती है कि व्यंग्य शदित तो इस कथाकार में जन्मजात ही रही। व्यंग्यात्मकता का एक उदाहरण यहाँ प्रस्तुत है- "दुनिया का दस्तूर है, नहीं तो लोग बाभनों को हजारों रुपये क्यों दे देते हैं, कौन देखता है, परलोक में मिलता है या नहीं। बड़े आदमियों के पास धन है, चाहे फूंकें। हमारे पास फूंकने को क्या है ?"
उददेश्य की दष्टि से यह कहानी यथार्थवादी है।आर्थिक विषमता वाले जिम समाज में एक ओर तथाकथित धनी-मानी और बड़े लोग बैठे-बैठे दुनिया के सारे आनन्द लेते हैं तथा निर्धन मजदूर एवं किसान रात-दिन कठिन परिश्रम करके भी दो जून की रोटी का जुगाड़ नहीं कर पाते, वहाँ घीसू और माधव के कामचोर हो जाने को लेखक ने उचित माना है।लेखक ने यहाँ किसानों मजदूरों में चेतना जगाने का प्रयास किया है।आर्थिक शोषण के विरुद्ध क्रान्ति-भावना भरना उसका उद्देश्य बन गया है। गरीबी व्यक्ति को किस स्तर तक संवेदनशून्य और जड़ बना सकती है। घीसू और माधव इसके ज्वलन्त उदाहरण हैं।किसी भी सभ्य समाज को आर्थिक स्थिति की ऐसी विषमता चिन्तनशील प्राणी को सोचने पर अवश्य बाध्य करेगी।
🔹कहानी की प्रस्तुती के अंग को स्पष्टकरे ।
उत्तर :
रोचकता, प्रभाव तथा वक्ता एवं श्रोता या कहानीकार एवं पाठक के बीच यथोचित सम्बद्धता बनाये रखने के लिये सभी प्रकार की कहानियों में निम्नलिखित तत्व महत्वपूर्ण माने गए हैं कथावस्तु, पात्र अथवा चरित्र-चित्रण, कथोपकथन अथवा संवाद, देशकाल अथवा वातावरण, भाषा-शैली तथा उद्देश्य। कहानी के ढाँचे को कथानक अथवा कथावस्तु कहा जाता है। प्रत्येक कहानी के लिये कथावस्तु का होना अनिवार्य है क्योंकि इसके अभाव में कहानी की रचना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कथानक के चार अंग माने जाते हैं - आरम्भ, आरोह, चरम स्थिति एवं अवरोह। कहानी का संचालन उसके पात्रों के द्वारा ही होता है तथा पात्रों के गुण-दोष को उनका 'चरित्र चित्रण' कहा जाता है। चरित्र चित्रण से विभिन्न चरित्रों में स्वाभाविकता उत्पन्न की जाती है। संवाद कहानी का प्रमुख अंग होते हैं। इनके द्वारा पात्रों के मानसिक अन्तर्द्वन्द एवं अन्य मनोभावों को प्रकट किया जाता है। कहानी में वास्तविकता का पुट देने के लिये देशकाल अथवा वातावरण का प्रयोग किया जाता है। प्रस्तुतीकरण के ढंग में कलात्मकता लाने के लिए उसको अलग-अलग भाषा व शैली से सजाया जाता है। कहानी में केवल मनोरंजन ही नहीं होता, अपितु उसका एक निश्चित उद्देश्य भी होता है।
🔹उपन्यास के विषय या स्त्रोत के आधार पर वर्गीकरण लिखिए
उत्तर :
उपन्यासों के प्रकार
[अ] तत्वों के आधार पर उपन्यास -
उपन्यास के तत्वों के आधार पर तीन भेद माने जाते हैं -
(१) घटना प्रधान
(२) चरित्र प्रधान और
(३) नाटकीय।
[आ] वर्ण्य विषय के आधारित उपन्यास -
वर्ण्य विषय के आधार पर उपन्यास निम्न प्रकार के होते हैं -
(१) धार्मिक
(२) सामाजिक
(३) आर्थिक
(४) ऐतिहासिक या आंचलिक आदि।
कुछ समीक्षक उपन्यासों की वास्तविकता प्रधान और कल्पना प्रधान दो भागों में ही रखना समीचीन मानते हैं। प्रत्येक विभेद का अलग-अलग विवरण प्रस्तुत करना उस स्तर के छात्रों के लिए आवश्यक नहीं है, क्योंकि नाम के अनुसार ही उनकी सामान्य विशिष्टियाँ दर्शाई जा सकती हैं।
[इ] आधुनिक युगीन उपन्यास -
आधुनिक युग में निम्नलिखित उपन्यास लिखे गये हैं -
1- भावुकतापूर्ण कल्पना प्रधान
2- आदर्शोन्मुख-यथार्थवादी
3- सुधारवादी जीवन दृष्टिकोण युग प्रस्तुत करने वाले।
🔹फंदी नाटक की शैली और संवाद योजना को स्पष्ट करे।
उत्तर :
नाटक का मुख्य किरदार फंदी है। उसका पिता कैंसर की आखिरी स्टेज में पहुंच चुका है। एक गरीब ट्रक चालक होने के बावजूद वह कर्ज लेकर अपने पिता का इलाज कराता है। कैंसर का इलाज नहीं होने के कारण वह काफी हताश हो जाता है।
इधर उसका पिता कैंसर के असहनीय दर्द से तड़फ रहा है वह अपने बेटे सगे संबंधियों से मौत मांगता है। उधर नेशनल ट्रांसपोर्ट कंपनी वाले फंदी से गांजे की स्मगलिंग करने के लिए कहते हैं, लेकिन फंदी के मना करने पर उसे नौकरी से निकाल देते हैं। नौकरी छूटने के बाद वह इतना लाचार हो गया कि उसके बच्चे रोटी को मोहताज हो जाते हैं। एक दिन फंदी के पिता असहनीय दर्द के कारण इच्छामृत्यु मांगता है और फंदी आवेश में अपने पिता को मौत के घाट उतार देता है।
नाटक में उमाशंकर मैडी ने फंदी, मोहित पांडे ने वकील, महेंद्र मेहरा ने वार्डर की भूमिका निभाई। निर्देशन उमाशंकर मैडी, सह निर्देशन मोहित पांडे, मंच निर्माण महेंद्र सिंह मेहरा, मंच सज्जा शेखर कुमार, प्रकाश व्यवस्था शेखर कुमार, प्रचार-प्रसार दीप तिवारी, बोसर निर्माण महेंद्र मेहरा ने किया। मंच संचालन दीप चंद्र तिवारी ने किया। मंच प्रबंधन नरेश बिष्ट ने किया।
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